बेल
दोस्तों, शंकर भगवान की पूजा बेल की पत्ता से ही होती है. इसीलिए औषधि द्रव के रूप में इस बेल का ज्ञान होना बहुत ज़रूरी है. बेल की रुक्ष के सामने महादेव की लिंग होना बहुत ही पवित्र माना जाता हैं. बेल के पत्ते को सुगंध आता है, बेल के पत्तों, फूल, साल, फल, मूली, औषधि द्रव के रूप में बहुत ही उपयुक्त हैं. मनुष्य के जीवन में आनन्द देने का रूक्ष है. इसीलिए इस रुक्श की जानकारी लेकर उनका गुनमन किया है. इस रिक्ष से हवा की शुद्धि बहुत ही उपयुक्त हैं. इसीलिए मनुष्य पुरी तरह से निरोगी रहता हैं.
बेल , ग्राही, वांती, शुल, मूत्रावरोध ठीक कर सकता है .बेल के पत्तों का रस का मजातांतू पर बहोत लाभ देता है. बेल की पत्ता की साल भी इसका औषधि के रूप में उपयोगी है.
बेल की पत्ता फ़ायदा,(Benifits)
बेल का पत्ता-बेल की पत्ता से ज़ख्म भी ठीक हो जाती हैं. बेल की बेल की पत्तियां पत्ता से कफ ठीक होता हैं.
बेल का फ़ल-बेल फ़ल का तेल निकाल के गर्भाशय के शुद्धि के लिए और वात व्याधि के लिए लाभकारी है. बेेल फ़ल का सरबत पेट की बीमारी के लिए लाभकारी हैं. और स्पुर्ती आती हैं.
अनिंद्रा-बेल की पत्तियां सुखाकर उसमे कमलबिज और अश्वगंध इनका मिलाकर रोज सुबह और शाम लेने से आराम मिलता है.
आंख दुखना, आंख लाल होती है, आंख में मैला जमन, आंख चिपकती है, इन सब पर बेल की पत्तियां पीसकर उसकी घड़ी आंखो पर रखने से आंखो की जलन कम होती है और आंख अच्छी होती हैं.
दमा की बीमारी मै कभी कभी कफ़ बाहर नहीं आता. मन में डर होने लगता है.
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